परछाइयों से एक सुलझा सा रिश्ता
धुले मकबरे शिकायतों के
समय की तरेड़ो में
प्यास की गुफाओं में
उम्र ही तो है।
धुले मकबरे शिकायतों के
समय की तरेड़ो में
प्यास की गुफाओं में
उम्र ही तो है।
ख्वाबों से हटती हसरतों की थकी सी धूल
टीसें छोड़ती अभिनय शायरी का
काले उलझे शोर को बंद कर
हो जाती है खुद से गुफ्तुगू
उम्र ही तो है।
कुछ मेले सिर्फ देखने के लिए होते
कुछ बहारो में हम नहीं भी होते
सर्द यादों के दहकते कुंड
कीमती समझौतों के उंघते सच
उम्र ही तो है।
महसूस करने और समझने के बीच की खाई पर
सब्र की बूंदों का पुल
तजुर्बे की शराब से न जाने
कितने अहसास गूंध लेता है
उम्र ही तो है।
16 Feb, 2016
टीसें छोड़ती अभिनय शायरी का
काले उलझे शोर को बंद कर
हो जाती है खुद से गुफ्तुगू
उम्र ही तो है।
कुछ मेले सिर्फ देखने के लिए होते
कुछ बहारो में हम नहीं भी होते
सर्द यादों के दहकते कुंड
कीमती समझौतों के उंघते सच
उम्र ही तो है।
महसूस करने और समझने के बीच की खाई पर
सब्र की बूंदों का पुल
तजुर्बे की शराब से न जाने
कितने अहसास गूंध लेता है
उम्र ही तो है।
16 Feb, 2016
No comments:
Post a Comment