Wednesday, February 21, 2018

एक ग़ज़ल

धुँधले दर्दों से छील कर
उकेरी एक पिघली सी ग़ज़ल
कुछ उदास कुछ नाराज़
टीस की भट्टी में जमीं बर्फ़ सी ग़ज़ल 
भूले सुर की थिरकती पीर
उड़ती सी राख सी ग़ज़ल
प्यास के जलते सिलसिले
गर्म रेत की नदी सी ग़ज़ल 
अनाम कोनो की बेआवाज़ बारिश
किसी बेवजूद टापू पर कोंधती सी ग़ज़ल 
आवारा लमहों का सुलगता ख़ुमार
किसी बिना जिए पाप सी ग़ज़ल 
हारी सी एक धड़कन का इसरार
ख़ुद से एक बेतकल्लुफ़ शिकायत सी ग़ज़ल

25 Nov, 2017

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