Wednesday, February 21, 2018

क्या बातें करते होंगे...

उस प्रेत प्रहर में
जब रात
अपनी नीरव सूनी 
नियति से समझौता कर लेती है 
जब अंधेरा
अपनी काली रेशमी आत्मा
में स्थिर हो लेता है 
जब बिना बसे जंगल
अपने बियाबान सपनों को
सोख सुखा लेते हैं 
तब दो बिसरे दरख़्त
अपनी झबरी समझ में
रात की नदी के सूखे अंधेरे में
क्या बातें करते होंगे?

Feb 13, 2018

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