पता तो है
पर चलो आज जिद का कारोबार करते हैं
आज मना करते हैं
ख़ुशी से दुश्मनी की इस आदत को
पता तो है
पर चलो आज लड़ ही जाते हैं इस उलझे गुबार से
आज भूल जाते हैं
खुद की रोती भूलों को
पता तो है
पर चलो आज इस सूनी रात में बुन दें कुछ नई गजलें
आज तोड़ देते हैं
इस काले कोहरे के प्याले को
पता तो है
पर आज जी लेते हैं उधार के एक गीत को
आज रोक लेते है
अपनी ही धड़कन को खुद को गाली देने से
पता तो है
पर आज लुटने से पीछे क्या हटना
आज एक आकाश गंगा पार करते है
बुलबुलों से बने इस उम्मीद के ख्वाब पर
पता तो है
पर आज नहीं मानते इस दूरी को
आज पोसेंगे
खालिस अंधरे से बनी इस बेकरारी को
पता आखिर क्यों है......
August 2015
पर चलो आज जिद का कारोबार करते हैं
आज मना करते हैं
ख़ुशी से दुश्मनी की इस आदत को
पर चलो आज लड़ ही जाते हैं इस उलझे गुबार से
आज भूल जाते हैं
खुद की रोती भूलों को
पर चलो आज इस सूनी रात में बुन दें कुछ नई गजलें
आज तोड़ देते हैं
इस काले कोहरे के प्याले को
पर आज जी लेते हैं उधार के एक गीत को
आज रोक लेते है
अपनी ही धड़कन को खुद को गाली देने से
पर आज लुटने से पीछे क्या हटना
आज एक आकाश गंगा पार करते है
बुलबुलों से बने इस उम्मीद के ख्वाब पर
पर आज नहीं मानते इस दूरी को
आज पोसेंगे
खालिस अंधरे से बनी इस बेकरारी को
August 2015
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