Thursday, November 5, 2015

पुराने होते रिश्ते

पुराने होते रिश्ते

कुछ खिलखिलाहटे
इस लम्बे सफ़र की साझा पदचापों की
समेटे
खंडहर साथ में हारी जीती उन लडाइयों के।

समय से सींची
एक झीनी सी हंसी का सागर
समेटे
सिलसिले उन गुनगुनाती शिकायतों के।

इतिहास की बारिश से सौंधी
एक गैर जरुरी झिड़की
समेटे
पुलिंदे उन कीमती समझौतों के।

कुछ खुशियाँ बहुत गहरी होती हैं
बगैर गुदगुदाए भी
भूले दर्द सी साथ रहतीं हैं
क्योंकि
वो समय के धीमे संगीत से गूंधी गयी होतीं हैं।

13 September, 2015

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