सुन्न सन्नाटा सफ़ेद
दिल के झोलों के रेगिस्तान
रेशमी बे करारी के सुस्त धुंए
आओ लाते है झीनी सी स्याही
और लिखते हैं तुम्हारा नाम
इन सांस लेते अंधेरों पर
सुलगता आमंत्रण
एक उलझता सा आकर्षण
एक बोलता सा वजन
लरजते पाप से इस क्षण में
आओ मिलते हैं किसी भटकते चाँद पर
सुनहरा छलकता एक पागलपन
घने कोहरे से बनी दीवार सा उन्माद
इस पिघलते समर्पण में
आओ बुन ले एक उमर
कहते हैं पुराने रिश्ते पुराने हो जाते हैं
पर क्यों होता है खंडहर का एक कोना
सारे असलीपन का सबसे शानदार घर
इतिहास के आराम से भरा साथ
साझा एक ब्रहमांड
हर बीता पल ,
यादों का एक दुर्ग
खुलते ख़त सा संभावनाओ से भरा
एक यात्रा
अजीब, कितनी उदार
सिर्फ झूमते बादल सा एक साझेपन का एक ठप्पा
आओ मुझे अहसास करा दो कि
मेरी दो बाहें भी है
घोंसला एक संसार का
29 August 2015
दिल के झोलों के रेगिस्तान
रेशमी बे करारी के सुस्त धुंए
आओ लाते है झीनी सी स्याही
और लिखते हैं तुम्हारा नाम
इन सांस लेते अंधेरों पर
एक उलझता सा आकर्षण
एक बोलता सा वजन
लरजते पाप से इस क्षण में
आओ मिलते हैं किसी भटकते चाँद पर
घने कोहरे से बनी दीवार सा उन्माद
इस पिघलते समर्पण में
आओ बुन ले एक उमर
पर क्यों होता है खंडहर का एक कोना
सारे असलीपन का सबसे शानदार घर
इतिहास के आराम से भरा साथ
साझा एक ब्रहमांड
यादों का एक दुर्ग
खुलते ख़त सा संभावनाओ से भरा
अजीब, कितनी उदार
सिर्फ झूमते बादल सा एक साझेपन का एक ठप्पा
आओ मुझे अहसास करा दो कि
मेरी दो बाहें भी है
घोंसला एक संसार का
29 August 2015
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