किसी सुस्त से मुहल्ले से
एक जैसे पर अलग अलग आवाज़ों से बने
कई मकान होते हैं
ख़ालीपन में
एक जैसे पर अलग अलग आवाज़ों से बने
कई मकान होते हैं
ख़ालीपन में
रिसता सा अकेलापन
और उसके छिटके से संगीत
कई भूले रेगिस्तान होते हैं
ख़ालीपन में
जमीं शिकायतों से
धड़कते गुनाहों से
कई फिसलते ठहराव होते
ख़ालीपन में
ये बरसता है
हसरतों की तरह
रिश्तों की तरह उगते
कई उधार होते हैं
ख़ालीपन में
आदत बन गयी दोस्तियों से
ख़ुद से की गई कई बेवफ़ाइयो से
कई टूटे मज़ार होते हैं
ख़ालीपन में
क्या ख़ूब है तुम्हारा न होना
कई तुम घिर आते हो
ख़ालीपन में
11 June, 2017
और उसके छिटके से संगीत
कई भूले रेगिस्तान होते हैं
ख़ालीपन में
जमीं शिकायतों से
धड़कते गुनाहों से
कई फिसलते ठहराव होते
ख़ालीपन में
ये बरसता है
हसरतों की तरह
रिश्तों की तरह उगते
कई उधार होते हैं
ख़ालीपन में
आदत बन गयी दोस्तियों से
ख़ुद से की गई कई बेवफ़ाइयो से
कई टूटे मज़ार होते हैं
ख़ालीपन में
क्या ख़ूब है तुम्हारा न होना
कई तुम घिर आते हो
ख़ालीपन में
11 June, 2017
No comments:
Post a Comment