Monday, September 2, 2019

कुछ सूनेपन सा गहरा महसूस करूँ

एक लम्बी साँस सी बहती नीली नदी में 
सुलगता एक सपना 

चुभते सन्नाटे में बदल जाता है 
सीधी बात सा मुश्किल सपना

शब्द साज़िश करते 
आरोप सी ख़ामोशियों के महल बुनते 

कुछ सूनेपन सा गहरा महसूस करूँ और 
गहराई तुमको दूँ उपहार में
न विद्वता, न सौंदर्य बोध और न ही शर्म 
बस हो लरजता तड़पता 
मेरा सम्वेदन
और 
आदिम ख़ालिस आह्लाद सी 
सहज नग्न 
मेरी अभिव्यक्ति





8 June, 2019

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