Monday, September 2, 2019

समझ एक भरी पूरी निर्धनता

समझ एक ठहराव है 
समझ का एक अभाव होता है 
सामंजस्य सम्मोहन और गति विहीनता

समझ एक लय की प्राप्ति है 
एक विलंबित 
प्रायः स्तब्ध लय
गति से परे 

समझ एक भरी पूरी निर्धनता है
गहरे नशे में सुस्त नदी
न भूख , न क्रोध , न तड़प
और शायद न ही कविता

समझ एक मुकम्मल प्यार है 
एक रंगीन सहमापन 
एक सुरों का बना पिंजरा
एक रुका हुआ घना काला आराम
 
समझौते  ज़िंदा रखते है
शायद सुखी भी
समझौते क़ीमत वसूलते है
और 
समझौते समझ से बने होते है। 
 
9 Aug, 2019

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